Kinds of E-way bill according to business
नई दिल्ली। ई-वे बिल लागू होने में 1 दिन बचे हैं। पर अभी भी कारोबारियों को उसे लेकर कई सारे कन्फ्यूजन हैं। ई-वे बिल में कितने तरह के फॉर्म हैं और उन्हें कैसे यूज करना है। सरकार ने ई-वे बिल में चार तरह के फॉर्म बनाए हैं, जो कारोबारियों की कैटेगरी के हिसाब से हैं।
4 तरह के हैं ई-वे बिल
ई-वे बिल-1
ई-वे बिल-1 गुड्स के लिए है। यानी डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर जो 50 हजार रुपए का स्टॉक एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजेगा वह ई-वे बिल-1 फॉर्म भरेगा। ये ई-वे बिल सबके लिए एक है।
ई-वे बिल-2
ई-वे बिल-2 ट्रासपोटर्स को भरना है। कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल, ई-वे बिल-2 फॉर्म के जरिए भरा जाएगा। एक ही व्हीकल में अलग-अलग डीलर्स का सामान, अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी का सामान भेजने पर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल भरना होगा। ये कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स को भरना होगा। ट्रांसपोर्टर्स अगल-अगल डीलर्स के लिए एक कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बना सकता है।
ई-वे बिल-3
ई-वे बिल-3 वैरिफिकेशन फॉर्म है जिसे जीएसटी अधिकारी भरेंगे। इस फॉर्म में प्रोडक्ट ले जा रहे है व्हीकल की जानकारी जैसे व्हीकल नंबर, ट्रांसपोर्टर और डीलर का नाम और नंबर भरा जाएगा। ये फॉर्म जीएसटी अधिकारी चेकिंग के समय भरेंगे। इसके अलावा इस फॉर्म में प्रोडक्ट की जानकारी होगी। ये फॉर्म डीलर, ट्रांसपोर्टर और जीएसटी अधिकारी कोई भी चेक कर सकता है।
ई-वे बिल-4
ई-वे बिल-4 डिटेन्शन फॉर्म है। यानी एक जीएसटी अधिकारी ने अगर 50 ट्रक को वैरिफाई किया है और उसमें से अगर 4 में अधिकारी को कुछ गढ़बढ़ लगता है, तो वह उन व्हीकल और प्रोडक्ट को जब्त कर लेगा। अधिकारी जिन भी ट्रक या प्रोडक्ट को जब्त करता है, वह उसकी जानकारी ई-वे बिल-4 में भरेगा। ई-वे बिल-4 में भरी जानकारी ट्रांसपोर्टर, डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर ऑनलाइन स्वयं भी चेक कर सकते हैं कि उनके कौनसे ट्रक जीएसटी अधिकारी ने जब्त कर लिए हैं।



